Puliyabaazi: अम्बेडकर के जातिप्रथा पर विचार: भाग २

पूरे भारत ने अपना सत्तरवाँ गणतंत्र दिवस पिछले हफ़्ते मनाया और अंबेडकर के योगदान को फिर एक बार याद किया |  पर अंबेडकर साहब जैसे बुद्धिजीवी को सम्मान देने का शायद सबसे प्रभावशाली तरीका है उनके विचारों को समझना | अब उनको पुलियाबाज़ी में ला पाना तो संभव नहीं है इसलिए इस बार हमने प्रयत्न किया उनके कुछ लेख पढ़ने का और उनके तर्क को आपके सामने रखने का | इस दो भाग स्पेशल में हमने विश्लेषण किया अंबेडकर के जातिप्रथा पर कुछ विचारों का |

भाग 2 में में सुनिए चर्चा उनके सबसे प्रसिद्ध लेख — Annihilation of Caste — पर | अंबेडकर ने यह भाषण 1936 में  लाहौर के जात-पात तोड़क मंडल के लिए तैयार किया था पर यह लेख इतना धमाकेदार था कि मंडल ने इसे प्रकाशित करने से मना कर दिया | अंत में अंबेडकर ने खुद इसे प्रकाशित किया | जातिप्रथा का उन्मूलन क्यूँ और कैसे किया जाए – यह लेख इन सवालों पर केंद्रित है | यह लेख इतना प्रसिद्ध हुआ कि गांधीजी ने भी इस पर अपने विचार रखे और अपनी असहमति के कारण समझाए | इस एपिसोड में हमने इस बेहद ज़रूरी वाद-विवाद पर चर्चा की है | सुनिए और बताइए कैसा लगा आपको|

साथ ही इस सीरीज़ के भाग १ में हमारी चर्चा सुनिए उनकी किताब The Untouchables पर |

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