अड़ोस-पड़ोस की बात

In our monthly column on India’s foreign policy in Rajasthan Patrika, we write that India’s “neighbourhood first” policy first requires a reimagination of the neighbourhood. We propose that India should go beyond South Asia and visualise itself as part of multiple neighbourhoods. The article explores the tools India has to imagine itself as a part of multiple neighbourhoods.

सबसे पहले हमें ‘पड़ोस’ शब्द को ही नए सिरे से सोचना होगा | पड़ोस को सिर्फ एक भुगौलिक संकल्पना के तौर पर देखना अनुचित होगा | असल में दक्षिण एशिया के बाहर भी भारत के कई सारे पड़ोसी है | आर्थिक तौर पर अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, क़तर, साऊदी अरब, और चीन भारत के पड़ोसी है | वैचारिक तौर पर इंडोनेशिया, यूरोप, और अमरीका भारत के पड़ोसी है और सुरक्षा मामलों के दृष्टिकोण से रूस, इजराइल भारत के पड़ोसी है | चूँकि भारत एक नहीं कई सारे ‘पड़ोस’ का अहम हिस्सा है हमारी विदेश नीति की प्राथमिकताएँ भी इस बहुभागी पड़ोस को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए |

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India and its multiple neighbourhood